CLA's हिन्दू विधि (Hindu Law) - 8th Edition 2026
| Author : | R. K. Agrawal |
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| CLA's हिन्दू विधि (Hindu Law) — आर० के० अग्रवाल द्वारा लिखित, Central Law Agency द्वारा प्रकाशित, 8वाँ संस्करण 2026 — हिन्दी माध्यम के विधि विद्यार्थियों के लिए हिन्दू विधि की मानक पाठ्यपुस्तक है। इसमें हिन्दू विधि के प्राचीन एवं आधुनिक स्रोत, मिताक्षरा एवं दायभाग शाखाओं का भेद, संयुक्त हिन्दू परिवार, सहदायिकी एवं कर्ता की शक्तियाँ, विभाजन, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के अन्तर्गत विवाह की शर्तें, शून्य एवं शून्यकरणीय विवाह, दाम्पत्य अधिकारों की प्रत्यास्थापना एवं विवाह-विच्छेद के आधार, हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 तथा 2005 के संशोधन द्वारा पुत्री का सहदायिक अधिकार, हिन्दू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956, हिन्दू अप्राप्तवयता एवं संरक्षकता अधिनियम 1956, स्त्रीधन, तथा धार्मिक एवं पूर्त न्यास का विस्तृत विवेचन है। LL.B., LL.M., न्यायिक सेवा एवं APO परीक्षाओं के लिए उपयोगी। भाषा — हिन्दी। |
Tags: Family Law, Hindu Law, Hindu Succession Act, Hindu Marriage and Divorce
CLA's हिन्दू विधि (Hindu Law) — आर० के० अग्रवाल (R. K. Agrawal) द्वारा लिखित, Central Law Agency द्वारा प्रकाशित, 8वाँ संस्करण 2026। यह हिन्दी माध्यम के विधि छात्रों के लिए हिन्दू विधि की मानक पाठ्यपुस्तक है। भाषा — हिन्दी।
हिन्दू विधि LL.B. पाठ्यक्रम का वह प्रश्नपत्र है जिसमें प्राचीन स्मृति-आधारित सिद्धांतों और 1955–56 के संहिताबद्ध अधिनियमों — दोनों को साथ-साथ समझना पड़ता है। अंग्रेज़ी माध्यम में इस विषय की अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं, किन्तु हिन्दी माध्यम के छात्र के लिए विकल्प सीमित हैं, और अनुवादित पुस्तकों की पारिभाषिक शब्दावली प्रायः परीक्षा में काम नहीं आती। आर० के० अग्रवाल की यह पुस्तक मूल रूप से हिन्दी में लिखी गई है, और उसी विधिक शब्दावली का प्रयोग करती है जिसकी अपेक्षा विश्वविद्यालय तथा न्यायिक सेवा परीक्षाओं में की जाती है।
Central Law Agency की यह पुस्तक दशकों से हिन्दी माध्यम के विधि विद्यार्थियों की प्रथम पसंद रही है, और 8वें संस्करण में इसे नवीनतम विधायी संशोधनों तथा उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुरूप अद्यतन किया गया है।
CLA's हिन्दू विधि (Hindu Law) by R. K. Agrawal, 8th Edition 2026, published by Central Law Agency, is the standard Hindi-medium textbook on Hindu Law for LL.B. students and judicial service aspirants. Written originally in Hindi, it uses the legal terminology that Indian universities and State judicial service examinations actually expect, rather than translated approximations.
विशेषताएँ / Key Features
- 8वाँ संस्करण 2026, Central Law Agency
- सम्पूर्ण पुस्तक हिन्दी माध्यम में — मानक विधिक पारिभाषिक शब्दावली सहित
- संहिताबद्ध एवं असंहिताबद्ध दोनों प्रकार की हिन्दू विधि का विवेचन
- चारों अधिनियम — हिन्दू विवाह, उत्तराधिकार, अप्राप्तवयता एवं संरक्षकता, दत्तक एवं भरण-पोषण
- नवीनतम उच्चतम न्यायालय के निर्णयों सहित
- परीक्षोपयोगी शैली — LL.B. तथा न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए उपयुक्त
- पेपरबैक · हिन्दी
विषय-वस्तु / Coverage
हिन्दू विधि का स्रोत एवं प्रयोज्यता. हिन्दू विधि के प्राचीन एवं आधुनिक स्रोत — श्रुति, स्मृति, निबन्ध, प्रथा, विधायन एवं न्यायिक निर्णय; हिन्दू कौन है और यह विधि किन पर लागू होती है।
मिताक्षरा एवं दायभाग. दोनों शाखाओं का भेद, संयुक्त हिन्दू परिवार, सहदायिकी (कोपार्सनरी), जन्म से अधिकार, तथा दोनों पद्धतियों में उत्तराधिकार का अन्तर।
संयुक्त हिन्दू परिवार एवं कर्ता. संयुक्त परिवार की संरचना, कर्ता की शक्तियाँ एवं दायित्व, विधिक आवश्यकता, पारिवारिक लाभ के लिए अन्तरण, तथा पुत्र का पवित्र कर्तव्य।
विभाजन (बँटवारा). विभाजन का अर्थ, कौन माँग कर सकता है, विभाजन योग्य सम्पत्ति, पुनर्मिलन, तथा विभाजन के पश्चात् अधिकार।
हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955. विवाह की शर्तें, सपिण्ड एवं प्रतिषिद्ध सम्बन्ध, विवाह का पंजीकरण, शून्य एवं शून्यकरणीय विवाह, दाम्पत्य अधिकारों की प्रत्यास्थापना, न्यायिक पृथक्करण, विवाह-विच्छेद के आधार, पारस्परिक सहमति से तलाक, तथा भरण-पोषण एवं स्थायी निर्वाहिका।
हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956. पुरुष एवं स्त्री हिन्दू की सम्पत्ति का निर्वसीयत उत्तराधिकार, वर्ग-1 एवं वर्ग-2 के उत्तराधिकारी, 2005 के संशोधन द्वारा पुत्री का सहदायिक अधिकार, स्त्री-धन, तथा उत्तराधिकार से अपवर्जन।
हिन्दू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956. दत्तक ग्रहण की वैध शर्तें, कौन दत्तक ले एवं दे सकता है, दत्तक का प्रभाव, तथा पत्नी, सन्तान, वृद्ध माता-पिता एवं आश्रितों के भरण-पोषण का अधिकार।
हिन्दू अप्राप्तवयता एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956. प्राकृतिक, वसीयती एवं न्यायालय द्वारा नियुक्त संरक्षक, उनकी शक्तियाँ, तथा अवयस्क के कल्याण का सिद्धांत।
स्त्रीधन एवं महिलाओं के सम्पत्ति अधिकार. स्त्रीधन की अवधारणा, हिन्दू स्त्री की सम्पत्ति, तथा 1956 की धारा 14 का प्रभाव।
धार्मिक एवं पूर्त न्यास. मठ, देवस्थान, शेबैत एवं महन्त, तथा धार्मिक बन्दोबस्ती से सम्बन्धित विधि।
यह पुस्तक किनके लिए है? / Who Should Buy This Book?
- हिन्दी माध्यम के LL.B. एवं B.A. LL.B. विद्यार्थी
- न्यायिक सेवा परीक्षा (सिविल जज) के अभ्यर्थी — विशेषकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड एवं झारखंड
- APO एवं अभियोजन अधिकारी परीक्षा के अभ्यर्थी
- LL.M. विद्यार्थी एवं शोधार्थी
- पारिवारिक एवं वैवाहिक मामलों में कार्यरत अधिवक्ता
- हिन्दी माध्यम में पढ़ाने वाले विधि प्राध्यापक
- विधि महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय पुस्तकालय
यह पुस्तक क्यों? / Why Choose This Book?
सबसे बड़ा कारण भाषा है। यह पुस्तक मूल रूप से हिन्दी में लिखी गई है — अनुवाद नहीं है। हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थी को परीक्षा में जिन पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग करना है, वे यहीं से मिलते हैं, और यही अन्तर उत्तर-लेखन में दिखाई देता है।
दूसरा कारण सन्तुलन है। पुस्तक असंहिताबद्ध विधि — मिताक्षरा, दायभाग, सहदायिकी, विभाजन — को उतना ही महत्त्व देती है जितना चारों संहिताबद्ध अधिनियमों को। न्यायिक सेवा परीक्षाएँ दोनों से प्रश्न पूछती हैं, और प्रायः विद्यार्थी असंहिताबद्ध भाग को छोड़ देते हैं।
तीसरा कारण यह है कि Central Law Agency की पुस्तकें दशकों से विधि-कक्षाओं में प्रयुक्त होती आई हैं, और 8वें संस्करण तक पहुँचना अपने आप में इसकी उपयोगिता का प्रमाण है।







