India Publishing Company's 10 वर्षीय मोटर दुर्घटना दावे डाईजेस्ट / Motor Accident Claims Digest 2016-2025 by S. K. Jain - Edition 2026 (Hindi)
| Author : | S.K. Jain |
|---|
| 10 वर्षीय मोटर दुर्घटना दावे डाईजेस्ट (Motor Accident Claims Digest) 2016-2025 — एस. के. जैन द्वारा संकलित, India Publishing Company, Indore द्वारा प्रकाशित संस्करण 2026 — उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के दस वर्षों के निर्णयों का विषयवार हिन्दी संकलन है, जिसमें कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के न्याय दृष्टान्त भी सम्मिलित हैं। इसमें दावा अधिकरण की अधिकारिता एवं धारा 166 के अन्तर्गत आवेदन, उपेक्षा एवं सहायक उपेक्षा, आय का निर्धारण, भावी सम्भावनाएँ, गुणक एवं व्यक्तिगत व्यय की कटौती, सहचर्य की क्षति एवं अन्त्येष्टि व्यय, स्थायी एवं अस्थायी निःशक्तता, अवयस्क, गृहिणी एवं छात्र के प्रकरण, बीमा कम्पनी का दायित्व एवं उपलब्ध बचाव, वसूली का अधिकार, हिट एण्ड रन एवं 2019 के संशोधन की व्यवस्था, ब्याज, अपील एवं निष्पादन, तथा कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के अन्तर्गत प्रतिकर सम्बन्धी निर्णय संकलित हैं। हार्डबाउंड, हिन्दी। |
Tags: Insurance Law, Case Digest, Motor Vehicles Act, Motor Accident Glaims Digest
10 वर्षीय मोटर दुर्घटना दावे डाईजेस्ट (Motor Accident Claims Digest) 2016–2025 — एस. के. जैन द्वारा संकलित, India Publishing Company, Indore द्वारा प्रकाशित, संस्करण 2026। इसमें कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के न्याय दृष्टान्त भी सम्मिलित हैं। हार्डबाउंड, भाषा — हिन्दी।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में प्रकरण प्रायः अधिनियम की धाराओं पर नहीं, बल्कि न्याय दृष्टान्तों पर तय होते हैं — गुणक (multiplier) कौन सा लगेगा, भावी सम्भावनाओं (future prospects) का कितना प्रतिशत जुड़ेगा, आश्रितों की संख्या के अनुसार व्यक्तिगत व्यय की कटौती कितनी होगी, सहचर्य (consortium) एवं अन्त्येष्टि व्यय की राशि क्या होगी, तथा बीमा कम्पनी को कौन से बचाव उपलब्ध हैं। अधिवक्ता के लिए आवश्यक यह है कि ये निर्णय एक ही स्थान पर, विषयवार, तत्काल उपलब्ध हों।
यही इस डाईजेस्ट का प्रयोजन है। 2016 से 2025 तक — पूरे दस वर्षों के उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय विषयवार संकलित कर प्रस्तुत किये गये हैं, जिससे अधिवक्ता अपने तर्क के अनुकूल दृष्टान्त शीघ्र खोज सके। साथ ही कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम से सम्बन्धित दृष्टान्त भी दिये गये हैं, क्योंकि व्यवहार में ये दोनों विधियाँ प्रायः साथ-साथ चलती हैं।
A ten-year subject-wise digest of Supreme Court and High Court decisions on motor accident claims from 2016 to 2025, compiled by S. K. Jain and published by India Publishing Company, Indore, together with case law on the Employees' Compensation Act. Hardbound, in Hindi.
विशेषताएँ / Key Features
- दस वर्षों (2016–2025) के निर्णयों का एक ही खण्ड में संकलन
- सम्पूर्ण डाईजेस्ट हिन्दी माध्यम में
- विषयवार व्यवस्था — न्यायालय में तत्काल सन्दर्भ हेतु उपयुक्त
- कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के न्याय दृष्टान्त भी सम्मिलित
- उच्चतम न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णय
- प्रतिकर की गणना सम्बन्धी निर्णयों पर विशेष बल
- हार्डबाउंड · हिन्दी · संस्करण 2026
विषय-वस्तु / Coverage
दावा एवं अधिकरण. मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का गठन एवं अधिकारिता, धारा 166 के अन्तर्गत आवेदन, कौन दावा कर सकता है, क्षेत्राधिकार, तथा विलम्ब एवं परिसीमा सम्बन्धी निर्णय।
दुर्घटना एवं उपेक्षा. दुर्घटना का घटित होना सिद्ध करना, उपेक्षा (negligence), सहायक उपेक्षा (contributory negligence) एवं अंश-निर्धारण, तथा साक्ष्य का मूल्यांकन।
प्रतिकर की गणना. आय का निर्धारण एवं आय का प्रमाण, भावी सम्भावनाएँ, आयु के अनुसार गुणक, आश्रितों की संख्या के अनुसार व्यक्तिगत व्यय की कटौती, तथा स्वनियोजित एवं अनियमित आय वाले मृतकों के प्रकरण।
परम्परागत मदें. सहचर्य की क्षति (consortium), सम्पदा की हानि, अन्त्येष्टि व्यय तथा अन्य परम्परागत शीर्षों के अन्तर्गत दी जाने वाली राशि।
क्षति के प्रकरण. स्थायी एवं अस्थायी निःशक्तता, निःशक्तता के प्रतिशत का प्रभाव, चिकित्सा व्यय, पीड़ा एवं कष्ट, तथा उपचार काल में आय की हानि।
विशेष वर्ग. अवयस्क, गृहिणी, छात्र, वृद्ध एवं बेरोजगार व्यक्तियों की मृत्यु या क्षति के प्रकरणों में प्रतिकर का निर्धारण।
बीमा एवं दायित्व. बीमा कम्पनी का दायित्व एवं उसे उपलब्ध बचाव, वैध चालक अनुज्ञप्ति का प्रश्न, वसूली का अधिकार (pay and recover), तृतीय पक्ष बीमा, तथा स्वामी एवं चालक का दायित्व।
हिट एण्ड रन एवं सांविधिक योजनाएँ. अज्ञात वाहन से हुई दुर्घटना, सांविधिक प्रतिकर की योजनाएँ, तथा 2019 के संशोधन द्वारा लायी गयी व्यवस्था।
ब्याज, अपील एवं निष्पादन. ब्याज की दर एवं अवधि, पंचाट का निष्पादन, अपील में प्रतिकर की वृद्धि या कमी, तथा विलम्ब की माफी।
कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम. नियोजन के दौरान एवं नियोजन से उद्भूत क्षति, प्रतिकर की गणना, आयुक्त के समक्ष कार्यवाही, तथा मोटर यान अधिनियम एवं इस अधिनियम में से विकल्प का प्रश्न।
यह पुस्तक किनके लिए है? / Who Should Buy This Book?
- मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में कार्यरत अधिवक्ता — दावेदार एवं बीमा कम्पनी, दोनों पक्षों की ओर से
- मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी एवं न्यायिक अधिकारी
- बीमा कम्पनियों के विधि अधिकारी एवं पैनल अधिवक्ता
- श्रम विधि एवं कर्मकार क्षतिपूर्ति के प्रकरणों में कार्यरत अधिवक्ता
- हिन्दी भाषी राज्यों — मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं उत्तराखंड — के अधिवक्ता
- न्यायिक सेवा के अभ्यर्थी
- विधि महाविद्यालय, बार एसोसिएशन एवं न्यायालय पुस्तकालय
यह पुस्तक क्यों? / Why Choose This Book?
सबसे बड़ा कारण समय की बचत है। दावा अधिकरण में बहस प्रायः दृष्टान्तों पर होती है, और दस वर्षों के निर्णयों का विषयवार संकलन अधिवक्ता को वह दे देता है जिसे खोजने में अन्यथा घंटों लगते।
दूसरा कारण भाषा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के अधिकांश दावा अधिकरणों में कार्यवाही हिन्दी में होती है, किन्तु इस विषय के अधिकांश डाईजेस्ट अंग्रेज़ी में हैं। हिन्दी में उपलब्ध संकलन व्यावहारिक दृष्टि से कहीं अधिक उपयोगी है।
तीसरा कारण कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम का समावेश है। नियोजन के दौरान हुई वाहन दुर्घटना में दावेदार के समक्ष दोनों विधियों में से विकल्प का प्रश्न उठता है, और दोनों के दृष्टान्त एक ही खण्ड में होना व्यवहार में बड़ी सुविधा है।









